तुम कहीं भी रहो, मैं तुम्हें ढूँढ़ लूँगा।
भी
ही
तो
मैं तुम्हारे घर आऊँगा।
हम इतना खो गए कि समय का पता नहीं चला।
हजारों वर्ष बाद इनका रंग हल्का नहीं पड़ा।
चाचाजी विशेष जानकारियाँ देते जा रहे थे।
तक