घुँघरुओं की सुन मेरे पाँव भी थिरकने लगे।
खनखनाहट
टिप-टिप
प्रातःकाल चिड़ियों की भली लगती है।
चहचहाहट
गड़गड़ाहट
अँधेरी रात में हवा की डरा रही थी।
सनसनाहट
छत से पानी की बूँदें टपक रही हैं।
बादलों की के साथ बिजली भी चमकने लगी।
पानी बरसते ही सबके छाते निकल आए।
झमाझम
राघव घर सूना लगता है।
के बिना
के पास
की ओर
माँ गरिमा बाजार गई।
के साथ
घर स्कूल था।
आकाश देखो।
नदी वृक्ष लगे थे।